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तेरे आने पे

तेरे आने पे
तुझसे चुपक के
कंधे पे सर रख के
रो लिया
कुछ बोला नहीं
तेरी गीली आँखों ने
सहला के मेरे बालों को
हौले से कुछ कहा
मैने सुना नहीं
तू जो नही थी
शब भर था ये सिलसिला
तेरी आहट के इंतज़ार मैं
करवट नही बदली मैने
कुछ कहती हैं ये नज़दीकियाँ अभी
बस ऐसे ही कुछ पल
तेरे दामन मैं गुज़र जायें
जन्नत मेरी इन्ही बाहों मैं है..

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Mulakaat

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